Thursday, 2 December 2010

KUCH DHOOND RAHI THI MAIN......?

SAB kuch toh hai mere paas ..per kuch dhund rahi thi main ....
Ishwar ne diya hai sab kuch mujhe ..per jaane kya dhund rahi thi main ...
kuch aisa jo ho sagar main moti jaisa ...
kuch aisa jisko khareed naa sake paisa ....
kuch aisa jiski koi keemat naa ho ...
kisi bhi bandhan main wo seemit naa ho ..
kuch aisa jo ho vishaal  aasmaan main udhane ke baad chidiya ko mile ek tinke jaisa ....
jab ek majdoor din bhar ki mehnat se kuch sikke kamaata hai ...
main dhund rahi thi kuch aisa ...jo ho un sikkon ko kamane ki khushi jaisa ....
kuch aisa jo ho sadiyon se sukhi padi zameen per ....
do boond barsaat jaisa ...
kuch aisa jo ho aakhiri saans leti zindagi ko mili dhadkan jaisa ....
zindagi bher andhera dekhti aankhon ko mili roshni jaisa ...
Main dhoond rahi thi kuch aisa ....jise khareed naa sake paisa ....



KHUSHIYON KI LUKA CHIPI YE ZINDAGI



बड़ी अजब सी..बड़ी गज़ब सी है ये ज़िन्दगी..


खुशियों की बरसात..और दुःख की आंधी मुट्ठी मैं रेत सी फिसलती ये ज़िन्दगी...


दुनिया कहे की सबको एक सा समझती है ये ज़िन्दगी..


पर मुझे क्यों लगता है..की हर घडी रूप बदलती है ये ज़िन्दगी...


रात को सो जाने पर..लगता नहीं की सुबह मिलेगी ये ज़िन्दगी..


सुबह उठने पर लगता नहीं की कब तक चलेगी ये ज़िन्दगी.....


कभी चाबी के खिलोने सी हंसती ये ज़िन्दगी.....


कभी मिटटी की गुडिया सी टूटती ये ज़िन्दगी...


अनगिनत रूप हैं इसके पर...फिर भी जी रहे हैं ये ज़िन्दगी..


आज है कल नहीं..बर्फ सी पिघलती ये ज़िन्दगी...


घर मैं खुशियों के दीप जलाती ये ज़िन्दगी..


ICU मैं आखिरी सांस लेती ये ज़िन्दगी.......


जी लो हर पल को.वरना पता नहीं कब धोखा दे दे ये ज़िन्दगी.........

Wednesday, 1 December 2010

YE HAI JALWA MEDIA KAA

कुछ दिनों पहले EAST DELHI मैं एक इमारत गिर गयी ...काफी हल्ला हुआ कई लोग भी मर गए कुछ ज़ख़्मी भी हुए...शाम का 
वक़्त था....चारों तरफ अफरा तफरी मची हुई थी....मैंने ऑफिस से वापस आकर जैसे ही न्यूज़ चैनल लगाये...सभी पर कोई न कोई न्यूज़ थी..सिर्फ एक चैनल इस न्यूज़ को कवर कर रहा था...

दिल मैं जैसे दहशत बैठ गयी की कोई जानकार ना हो...गरीबों का क्या होगा? चैनल PER बार बार एक ही बात...इस समाचार  को सबसे पहले हमने दिखाया है....चलिए सीधे आपको अपने रिपोर्टर के पास लिए चलते हैं......मेरी नज़र वहीँ RUK गयी पानी का ग्लास टेबल PER जैसे का तेसा रख दिया...दिमाग जैसे सुन्न PADH चुका था.....रिपोर्टर से चैनल द्वारा बोला गया की घटनास्थल से किसी से लाइव बात करवा दें...रिपोर्टर ने भी किसी को पकड़ लिया और बेतुके सवाल करने लगी....जैसे की  इमारत कितनी पुरानी थी?...कितने लोग इसमें रहते थे? आपको क्या लगता है कितने लोग इसमें फंसे होंगे? वगेराह वगेराह......


जिस इंसान को REPORTER ने अपनी बातों मैं लगा रखा था वो बेचारा बोलता जा रहा था......मैडम आपसे गुज़ारिश है मेरे INTERVIEW मैं वक़्त बर्बाद ना करें.....जल्दी से कुछ करवाएं यहाँ इस वक़्त लोगों की जिंदिगी बड़ी कीमती है.....पर रिपोर्टर ने कहाँ सुन न था?......एक ही बात को बार बार सुना रही थी ...हमने इस दुर्घटना को सबसे पहले कवर किया है.......खैर काफी देर के बाद सुनवाई हुई पर दिल मैं एक टीस सी उठी...क्या मीडिया भी आम आदमी की पहुँच से उपर चला गया?......शर्म करो हम किसपर भरोसा करें?...शायद अब वक़्त की दरकार यही है की खुदी को KER बुलंद ITNA...की खुदा भी तुझसे यही पूछे की बता तेरी RAZA क्या है........अगर आस पास के लोग उनकी मदद के लिए नहीं आते तोह शायद नुक्सान इतना होता जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती....